दिल से

कैसा ये नववर्ष है , जिससे सूरज भी शरमाया है…

हवा लगी पश्चिम की ,
सब कुप्पा होकर फूल गए ।
ईस्वी सन तो याद रहा ,
पर अपना संवत्सर भूल गए ।।

चारों तरफ नए साल का ,
ऐसा मचा है हो-हल्ला ।
बेगानी शादी में नाचे ,
जैसे कोई दीवाना अब्दुल्ला ।।

धरती ठिठुर रही सर्दी से ,
घना कुहासा छाया है ।
कैसा ये नववर्ष है ,
जिससे सूरज भी शरमाया है ।।

सूनी है पेड़ों की डालें ,
फूल नहीं हैं उपवन में ।
पर्वत ढके बर्फ से सारे ,
रंग कहां है जीवन में ।।

बाट जोह रही सारी प्रकृति ,
आतुरता से फागुन का ।
जैसे रस्ता देख रही हो ,
सजनी अपने साजन का ।।

अभी ना उल्लासित हो इतने ,
आई अभी बहार नहीं ।
हम अपना नववर्ष मनाएंगे ,
न्यू ईयर हमें स्वीकार नहीं ।।

लिए बहारें आँचल में ,
जब चैत्र प्रतिपदा आएगी ।
फूलों का श्रृंगार करके ,
धरती दुल्हन बन जाएगी ।।

मौसम बड़ा सुहाना होगा ,
दिल सबके खिल जाएँगे ।
झूमेंगी फसलें खेतों में ,
हम गीत खुशी के गाएँगे ।।

उठो खुद को पहचानो ,
यूँ कब तक सोते रहोगे तुम ।
चिन्ह गुलामी के कंधों पर ,
कब तक ढोते रहोगे तुम ।।

अपनी समृद्ध परंपराओं का ,
आओ मिलकर मान बढ़ाएंगे ।
आर्यवृत के वासी हैं हम ,
अब अपना नववर्ष मनाएंगे ।।

 

Omp Min 1 |

रचनाकार:

मूलतः शांत स्वभाव के दिखने वाले श्री ओम प्रकाश गुप्ता (सम्पर्क: 9907192095)  एक प्रखर राष्ट्रवादी ,विद्रोही रचनाकार लेखक एवं समाज सेवक है जो समसामयिक विषयों पर अपनी तल्ख रचनाओं एवं टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं| 

डॉ0 ओम प्रकाश गुप्ता

डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता (संपर्क: 9907192095) एक प्रखर राष्ट्रवादी लेखक और समाज सेवक हैं, जो अपनी विद्रोही रचनाओं और समसामयिक विषयों पर तीक्ष्ण टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। शांत स्वभाव के बावजूद, उनके लेखन में सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज और राष्ट्रहित की गहरी प्रतिबद्धता झलकती है। उनकी रचनाएँ न केवल सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती हैं, बल्कि राष्ट्रहित और गौ माता जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों की रक्षा के प्रति जागरूकता उत्पन्न करती हैं।

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