योग का अर्थ है जोड़ना यह धर्म,जाति, संप्रदाय व देश से मनुष्य को मनुष्य से जोड़ता है: भिखारी प्रजापति

विश्व हिंदू महासंघ के उत्तर प्रदेश मंत्री प्रमोद त्यागी ने बताया कि विश्व हिन्दू महासंघ उत्तर प्रदेश अध्यक्ष व सदस्य राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भिखारी प्रजापति ने आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बताया कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, औद्योगिक विकास के पूर्व साधु-संत, सन्यासी, ऋषि, महर्षि आसन, ध्यान प्राणायाम के द्वारा यौगिक क्रियाएं करते रहे हैं खेती, किसानी, मजदूरी करने वाले लोग दिनभर हल के पीछे पीछे चलते,फावड़ा, कुदाल चलाते, कामकाजी महिलाएं गेहूं पीसने के लिए चक्की चलाने से लेकर ओखली में मूसल से कूटने निराई, गुड़ाई , कटाई जैसे कार्य करती थीं।

सभी लोग शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ थे जिस कारण अलग से योग करने की कोई जरूरत नहीं थी और अब औद्योगिक विकास व सुविधा भोगी संसार के चलते योग दिनचर्या का एक आवश्यक अंग बन गया है,स्कूली पाठ्यक्रम में भी योग को शामिल करना जरूरी हो गया है।

स्वस्थ जीवन जीने की कला को योग कहते हैं। योग का अर्थ है जोड़ना यह धर्म,जाति, संप्रदाय व देश से मनुष्य को मनुष्य से जोड़ता है । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है । यह दिन वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है और योग भी मनुष्य को सबसे लंबा जीवन प्रदान करता है।

पहली बार यह दिवस 21 जून सन 2015 को मनाया गया, जिसकी पहल भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण से की थी, इसे ही योग दिवस, विश्व योग दिवस, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के नाम से जाना गया।

यह हमारे देश की महत्ता है, जिसने पूरी दुनिया को योग करने के लिए प्रेरित किया।कुछ विद्वानों का मानना है कि भगवान शिव ने सबसे पहले अपने सात शिष्यों को ग्रीष्म संक्रांति के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा के दिन योग की दीक्षा दी थी, इसे शिव के अवतरण दिवस और दक्षिणायन के नाम से भी जाना जाता है।

योगी अपनी यौगिक क्रियाओं द्वारा अपनी प्राण वायु को मृत प्राणी के शरीर में धारण कर जीवित भी कर सकता है तथा पुनः प्राणवायु को अपने शरीर में स्थापित कर जीवित हो सकता है।

21 जून 2015 को पहला अंतर्राष्ट्रीय योग प्रधानमंत्री मा0 नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में दिल्ली के राजपथ पर मनाया गया। इस अवसर पर 35985 लोग और 84 देशों के प्रतिनिधियों ने एक साथ भाग लेकर दो विश्व रिकॉर्ड कायम किए थे।

योग शब्द संस्कृत के युज् धातु से बना है, जिसका अर्थ है जोड़ना, जुड़ना,एकजुट होना या शामिल होना। यह वस्तुतः विज्ञान पर आधारित एक आध्यात्मिक विषय है, जिसमें व्यक्ति की चेतना ब्रह्मांड की चेतना से जुड़ जाती है ।

योग की बहुत सी पठनीय पुस्तकें हैं,श्रीमद्भगवद्गीता पातंजल योग, योग वशिष्ठ, हठयोग,प्रदीपिका हठ योग, अष्टांग योग, घेरंड संहिता, योगतत्वोपनिषद, प्राचीन बौद्ध, जैन और नाथ संप्रदाय इत्यादि प्रमुख हैं। आसन, प्राणायाम और ध्यान योग के कुछ हिस्से हैं। संपूर्ण योग के आठ अंग हैं। महर्षि पतंजलि ने कहा है कि योगश्चित्तवृत्ति निरोध अर्थात चित्त की वृत्तियों का निरोध करना ही योग है, श्री कृष्ण ने समत्वम् योग उच्यते अर्थात समता धारण करना ही योग है।

योगः कर्मसु कौशलम अर्थात अपने कर्मों में कुशलता प्राप्त करना ही योग है, ऐसा कहकर भगवान श्री कृष्ण ने कर्मयोग को सर्वोच्च स्थान दिया है। गोरखनाथ का नाथ पंथ हठयोग की साधना पद्धति पर आधारित है। गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि गोरख जगायो जोग, अष्टांग योग के अंतर्गत यम, नियम,आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा,ध्यान, समाधि आते हैं ।

यौगिक क्रियाओं के प्रमुख रूप क्रिया योग, सहज योग, मंत्रयोग, समाधि योग, कुंडलिनी योग, हठयोग,जय योग, शब्द योग, प्रेम योग, शरणागत योग,राजयोग, सिद्ध योग,तंत्र योग, ध्यानयोग, पूर्ण योग इत्यादि हैं श्रीमदभगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने योग की विभिन्न विधाएं बताई हैं, यथा समत्वयोग ,कर्मयोग,भक्ति योग, ज्ञानयोग, आत्म संयम योग,ध्यान योग, आत्म योग, ब्रह्म योग, सन्यास योग इत्यादि।

योग के प्राचीन आचार्य आदियोगी भगवान शिव, योग योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण, महर्षि पतंजलि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि व्यास , महर्षि याज्ञवल्क्य , महायोगी गुरु गोरखनाथ हैं।

योग के आधुनिक आचार्य स्वामी रामकृष्ण परमहंस, लाहिड़ी जी, स्वामी विवेकानंद, रमण महर्षि, श्री अरविंद, योगिराज देवरहा बाबा,योगानंद, बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर जी हैं। वास्तव में योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है। इस उपहार को हमें धरोहर के रूप में सजोये रखना है।

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