Russia: पुतिन और डोभाल के बीच करीब 55 मिनट तक बातचीत
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ आमने-सामने की बैठक के दौरान Russia के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सारे प्रतिनिधियों और अधिकारियों से कमरा खाली करवा लिया था. पुतिन और डोभाल के बीच करीब 55 मिनट तक बातचीत हुई.
अजीत डोभाल ने 9 फरवरी को रूसी राष्ट्रपति से मुलाकात की थी, जहां दोनों देश भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को लागू करने की दिशा में काम जारी रखने पर सहमत हुए थे.मॉस्को में भारतीय दूतावास ने इस बाबत ट्वीट कर कहा था, ‘एनएसए अजीत डोभाल ने महामहिम राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की.
इस दौरान द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई. (दोनों) भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को लागू करने की दिशा में काम जारी रखने पर सहमत हुए.’ जबकि क्रेमलिन ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन ने अफगानिस्तान पर बहुपक्षीय परामर्श में भाग लेने वाले प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात की.
दूसरी तरफ एक सूत्र ने बताया कि, ‘यह आमने-सामने की मुलाकात थी. पुतिन चाहते थे कि सभी प्रतिनिधिमंडल और अधिकारी कमरे से बाहर चले जाएं. इसके बाद दोनों ने द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की.’ उन्होंने इसके साथ ही बताया, ‘धारणा साझा करना एक महत्वपूर्ण पहलू था, जिस पर उन्होंने चर्चा की… यह महत्वपूर्ण है कि रूसी राष्ट्रपति ने एनएसए से आमने-सामने बात की. यह 55 मिनट की मुलाकात थी.’
डोभाल अफगानिस्तान पर सुरक्षा परिषदों के सचिवों/एनएसए की पांचवीं बैठक में शिरकत करने बुधवार को मॉस्को पहुंचे थे. अफगानिस्तान को लेकर राष्ट्रपति पुतिन के हवाले से क्रेमलिन ने कहा, ‘हम इस बात से भी चिंतित हैं कि गैर क्षेत्रीय ताकतें अफगानिस्तान के हालात का इस्तेमाल कर अपने आधारभूत ढांचा का विस्तार या उनके निर्माण की कोशिश कर रही हैं.’ उन्होंने कहा, ‘ये देश अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का मुकाबला करने के बहाने से ये करेंगे लेकिन वे ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं जो वास्तविक तौर पर आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए असल में जरूरी है.’
वहीं डोभाल ने बुधवार को बैठक को संबोधित करते हुए साफ कहा था कि किसी भी देश को आतंकवाद तथा कट्टरपंथ फैलाने के लिए अफगानिस्तान की सरजमीं का इस्तेमाल करने नहीं दिया जाना चाहिए और भारत अफगानिस्तान के लोगों को जरूरत के वक्त कभी अकेला नहीं छोड़ेगा.इस बैठक में रूस और भारत के अलावा, ईरान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, चीन, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

