स्वास्थ्य

कान का दर्द: कैसे करें घर पर ही उपचार?

कान में फुंसी निकलने, सर्दी लग जाने या फिर कान में किसी तरह की चोट लग जाने की वजह से कान में दर्द होने लगता है। कान में ज्यादा दर्द होने की वजह से रोगी को रात भर नींद नहीं आती और वह हर समय तड़पता ही रहता है।

जब बच्चे के कान में दर्द होता है तो वह बार-बार जोर-जोर से रोता रहता है क्योंकि वह कह तो सकता नहीं है कि उसके कान में दर्द हो रहा है। कान का दर्द किसी को भी हो सकता है।

कान में दर्द होने के वैसे तो बहुत से कारण हो सकते हैं पर सबसे प्रमुख कान में दर्द होने का कारण सर्दी के मौसम में जब हम बस या गाड़ी में सफर करते हैं तो हवा बड़ी तेज लगती है और वही तेज और ठंड़ी हवा कान में घुस जाने की वजह से कान में दर्द होता है। नहाते समय भी अगर पानी कान में चला जाता है तो भी कान में दर्द होने लगता है।

बच्चे को दूध पिलाते समय अगर मां का दूध बच्चे के कान में चला जाये या फिर बच्चे को नहलाते समय कान में पानी चला जाये तो बच्चे के कान में दर्द होने लगता है।

कई अनुभवियों के मुताबिक कान में दर्द वात (गैस), पित्त, या कफ (बलगम) के रोग के कारण भी हो सकता है। किसी बच्चे के दूध पीने पर पेट में गैस बन सकती है जिसकी वजह से भी कान में दर्द हो सकता है। जब किसी को 2-3 दिन तक लगातार जुकाम लगा रहता है तो भी कान में दर्द हो सकता है

 कान पर किसी तरह की चोट लग जाने की वजह से खून निकलने पर भी कान में दर्द होने लगता है. कान में दर्द होने पर रोगी हर समय बैचेन सा रहता है।

उसे रात को नींद भी नहीं आती। कान में हर समय दर्द रहता है। बच्चों के कान में दर्द होने पर वह रोता रहता है और अपना हाथ बार-बार अपने कान की तरफ ले जाता रहता है और जैसे ही कोई उसके कान को जरा सा भी छूता है तो वह जोर-जोर से रोने लगता है|

भोजन करते समय सब्जी के अन्दर 4-5 बूंदे नींबू के रस की डाल देनी चाहिए।भोजन हमेशा सादा, हल्का और जल्दी पचने वाला ही करना चाहिए।

नहाते समय कान में साबुन या पानी नहीं जाना चाहिए।अगर कान में दर्द हो या खुजली हो रही हो तो कान में कोई नुकीली चीज नहीं डालनी चाहिए।

उपचार-

1. तिल : 120 मिलीलीटर तिल का तेल, लगभग 900 मिलीलीटर धतूरे का रस, लगभग आधा ग्राम सेंधानमक और 10 मदार के पत्ते और लगभग लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग अफीम को कड़ाही में डालकर पका लें। जब पकने के बाद सब कुछ जल जाये तो उसे उतारकर और छानकर एक शीशी में भर लें। नीम के पत्तों और फिटकरी को पानी में डालकर पकाकर छान लें।

फिर इस पानी से पहले कान को साफ कर लें। फिर बनाये हुये तेल की 4-5 बूंदें रोजाना कान में डालने से कान से मवाद बहना, कान का दर्द और बहरापन दूर हो जाता है।

तिल के तेल में लहसुन की कली डालकर गर्म करे जब लहसून जल जाए तो छानकर तेल को शीशी में भर लें। इस तेल की कुछ बूंदे कान में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है।

250 मिलीलीटर तिल के तेल को 100 मिलीलीटर मूली के रस में मिलाकर पका लें। जब पकने के बाद बस तेल ही बाकी रह जाये तो इसे छानकर शीशी में भर लें। इसकी 2-3 बूंदे सुबह-शाम कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।अजाझाड़ा के पंचांग (जड़, डाल, पत्ती, फल और फूल) की राख को तिल्ली के तेल में उबालकर कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

2. आम :कान में आम और सिरस के पत्तों के रस को हल्का सा गर्म करके डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।आम के पत्तों के रस को हल्का सा गर्म करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

3. सुदर्शन : सुदर्शन के पेड़ के पत्तों का रस निकालकर गुनगुना करके कानों में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

4. अनार :थोड़े से अनार के छिलके और 2 लौंग को लेकर सरसों के तेल में डालकर अच्छी तरह से पका लें। पकने के बाद इस तेल को छानकर एक शीशी में भर लें। इस तेल को कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।खट्टे अनार के रस में शहद मिलाकर कान में डालने से कान का पैत्तिक दर्द दूर हो जाता है।

5. हुलहुल : सफेद हुलहुल के पत्तों को पीसकर रस निकालकर थोड़ा-सा गर्म करें। इसे कान में बूंद-बूंद करके डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

6. धतूरा :कान के दर्द को ठीक करने के लिए धतूरे के ताजे पत्तों के रस को गुनगुना करके 2 बूंद कान में डालें। इससे दर्द ठीक हो जाता है।
धतूरे के पत्तों के रस को आग पर गर्म करके लेप जैसा पदार्थ बना लें। इसे कान की सूजन पर लगाने से आराम मिलता है।

कान से मवाद बह रहा हो तो 80 मिलीलीटर सरसों का तेल, 10 ग्राम गंधक, 320 मिलीलीटर धतूरे के पत्तों का रस मिलाकर पका लें। इस तेल की 1-1 बूंद कान में सुबह-शाम डालने से कान के दर्द में आराम मिलता है।धतूरे के पत्तों के रस को गर्म करके 2-3 बूंद कान में टपकाने से कान दर्द से छुटकारा मिलता है।

धतूरा के रस 400 मिलीलीटर, धतूरा के रस में चटनी की तरह पिसी हुई हल्दी 25 ग्राम और तिल का तेल 100 मिलीलीटर तीनों को मिलाकर पका लें। जब तेल चौथाई मात्रा में रह जाए तो इसे छान लें। कान के नाड़ी के घाव को ठीक करने के लिए इसका उपयोग करें।

7. कुटकी : कुटकी और काली जीरी को पीसकर कान के अन्दर जड़ की गांठों में गर्म-गर्म करके लगाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

8. हुरहुर : हुरहुर के रस को कान में डालने से कान के कीड़े खत्म हो जाते हैं जिसके फलस्वरूप कान का दर्द तथा अन्य रोग ठीक हो जाते हैं।

9. सफेद कत्था: पिसे हुये सफेद कत्थे को गुनगुने पानी में मिलाकर कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

10. प्याज :प्याज या लहसुन के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान के दर्द में लाभ मिलता है।1 प्याज को गर्म राख में रखकर भून लें और इसे पीस लें। फिर इसका रस निकालकर गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

कान में दर्द, कान से पीब बहना और कान में अजीब-अजीब सी आवाजें सुनाई पड़ना और बहरापन होना आदि रोगों को ठीक करने के लिए प्याज के रस को थोड़ा सा गर्म करके कान में 5-6 बूंदें डालें इससे लाभ मिलेगा।

गधे की लीद (टट्टी) का रस, गुलाबजल, सिरका और प्याज के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।
प्याज के बीच के भाग को निकालकर गर्म कर लें। फिर इस गर्म भाग को कान में रखने से कान का दर्द चला जाता है।

11. ऊंट का पेशाब : ऊंट के पेशाब को कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

12. चुकन्दर : चुकन्दर के पत्तों के रस को गुनगुना सा करके बूंद-बूंद करके कानों में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है।

13. पीपल :कलिहारी की जड़ के रस में पीपल, हुरहुर, सोंठ और मिर्च का रस मिलाकर कान में डालने से कान के कीड़े मर जाते हैं और कान का दर्द ठीक हो जाता है।

10-10 ग्राम पीपल, सेंधानमक, कूट, बच, सोंठ, हींग और लहसुन को एक साथ मिलाकर पीस लें। 250 मिलीलीटर सरसों के तेल और 250 मिलीलीटर आक (मदार) के रस में यह चूर्ण डालकर पका लें।

अच्छी तरह से पक जाने के बाद इस तेल को उतारकर छान लें। इस तेल को रोजाना कान में डालने से कान में से मवाद का बहना, बहरापन, कान के कीड़े और कान का दर्द जैसे सब रोग ठीक हो जाते हैं। इस तेल को कान में डालने से पहले कान को 4-5 बार नीम के पानी से अच्छी तरह से धो लें।

14. बैंगन :बैंगन और सरसों के तेल को गर्म करके गाय के पेशाब के साथ पीसकर उसमें हरताल की राख को मिलाकर कान में डालने से कान के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

बैंगन को आग में भूनकर उसका रस निकाल लें। फिर उसके अन्दर नीम का गोंद मिलाकर गुनगुना करके बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है।

15. शहद :3 ग्राम शहद, 6 मिलीलीटर अदरक का रस, 3 मिलीलीटर तिल का तेल और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सेंधानमक को एक साथ मिलाकर इसकी थोड़ी सी बूंदें कान में डालकर उसके ऊपर से रूई लगा देने से कान से कम सुनाई देना, कान का दर्द, कान में अजीब-अजीब सी आवाजें सुनाई देना आदि रोग दूर हो जाते हैं।

शहद में समुद्रफेन को घिसकर कान में डालने से बहरेपन का रोग ठीक हो जाता है।5 ग्राम सूरजमुखी के फूलों का रस, 5 ग्राम शहद, 5 ग्राम तिल का तेल और 3 ग्राम नमक को मिलाकर कान में बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

16. थूहर : थूहर के पत्तों को गर्म करके और पीसकर उसका रस निकाल लें। उस रस को रोजाना 3-4 बार 2-3 बूंदें कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

17. फरहद : फरहद के पत्तों के रस को हल्का-सा गर्म करके रोजाना 3 से 4 बार 2-3 बूंदें कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

18. लालमिर्च :लालमिर्च को पीसकर बकरे के पेशाब में मिलाकर कान के अन्दर डालने से कान का चाहे कितना भी तेज दर्द हो वह ठीक हो जाता है।लालमिर्च के बीज को पानी में मिलाकर हाथों से मसल लें।इस पानी की बूंदों को कान में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है।

19. बेल : 200 मिलीलीटर बकरी का दूध और 25 ग्राम कच्चे बेल के गूदे को एक साथ लेई (पेस्ट) बना लें और इसके अन्दर 40 मिलीलीटर बकरी का पेशाब और 100 मिलीलीटर सरसों के तेल को डालकर अच्छी तरह पका लें। इस तेल को कान में डालने से कान से मवाद बहना, कान का दर्द और बहरेपन का रोग ठीक हो जाता है।

20. सेंधानमक :थोड़े से सेंधानमक को बकरी के दूध में मिलाकर गर्म कर लें। इसे कान में डालने से कान का दर्द, कान में से मवाद बहना या कान का किसी भी तरह का रोग दूर हो जाता है। बकरे के पेशाब में सेंधानमक मिलाकर कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

21. सौंफ : 10-10 ग्राम सौंफ, बच, पीपलामूल, कूठ, नागरमोथा और रसौत को एक साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इसके बाद लगभग 650 मिलीलीटर केले का रस, 650 मिलीलीटर बिजौरा नींबू का रस, लगभग 3 किलोग्राम मधुशूक्त और 650 मिलीलीटर सरसों का तेल मिलाकर पका लें।

पकने के बाद जब बस तेल बाकी रह जाये तो इसे उतारकर छान लें और एक शीशी में भरकर रख लें। इस तेल को कान के अन्दर डालने से कान का दर्द, कान से मवाद बहना और बहरापन जैसे रोग ठीक हो जाते हैं।

22. ब्राण्डी : ब्राण्डी (शराब) की थोड़ी सी बूंदें कान में डालने से कान का दर्द चला जाता है।

23. सरसों : कान में दर्द होने पर सरसों के तेल को गर्म करके डालने से दर्द ठीक हो जाता है। 250 मिलीलीटर सरसों के तेल में 10-10 ग्राम हींग, बच, सोंठ और सेंधानमक को लेकर पीस लें और इसे 250 ग्राम (आक) मदार के रस और 250 मिलीलीटर धतूरे के रस में डालकर पका लें। पकने के बाद इसे उतारकर छान लें और एक शीशी में भर लें।

इस तेल की 5-6 बूंदें रोजाना कान में डालने से कान का दर्द, बहरापन, कान में अजीब-अजीब सी आवाजें होना और कान में से मवाद बहना आदि रोग ठीक हो जाते हैं।

10 मिलीलीटर सरसों का तेल लेकर उसके अन्दर 3 ग्राम हींग डालकर गर्म कर लें। इस तेल की 1-1 बूंद कान में डालने से बलगम के रोग के कारण पैदा हुआ कान का दर्द ठीक हो जाता है।

सरसों के तेल में लहसुन को डालकर उबाल लें और छान लें। फिर इस तेल को छानकर गुनगुना-सा ही बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का जख्म, कान से मवाद बहना और कान का दर्द ठीक हो जाता है। सरसों के तेल में लौंग डालकर जला लें। फिर इस तेल को कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

24. दौना : दौना (दवना) का रस कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

25. वनतुलसी : वनतुलसी के पत्तों के रस को कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

26. देवदारू : देवदारू (केलोन) के तेल को कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

27. पोस्ता : पोस्ता के काढ़े से कान की सिंकाई करने से कान का दर्द ठीक हो जाता है। अगर कान के अन्दर दर्द हो तो इस काढ़े को छानकर, साफ करके और गुनगुना करके बूंद-बूंद करके कान के अन्दर डालने से दर्द दूर हो जाता है।

28. सिरसा : सिरसा के पत्तों के रस को गर्म करके उसके अन्दर थोड़ी सी हींग मिलाकर कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

29. तारपीन : कान में तारपीन के तेल 4-5 बूंदे डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

30. फिटकरी : रूई की एक लम्बी सी बत्ती बनाकर उसके आगे के सिरे में शहद लगा दें और उस पर लाल फिटकरी को पीसकर उसका चूर्ण लपेट दें। इस बत्ती को कान में डालकर एक दूसरे रूई के फोहे सें कान को बन्द कर दें। ऐसा करने से कान का जख्म, कान का दर्द और कान से मवाद बहना आदि रोग ठीक हो जाता है।

31. बबूल : बबूल के फूलों को सरसों के तेल में डालकर पका लें। इस तेल को कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

32. हींग :हींग को तिल के तेल में पकाकर उस तेल की बूंदें कान में डालने से तेज कान दर्द ठीक हो जाता है।हींग और सरसों के तेल को गर्म करके छान लें। जब तेल बस हल्का-सा गर्म रह जाये तो उसे कान के अन्दर बूंद-बूंद करके डालने से कफ (बलगम) के कारण होने वाला कान का दर्द समाप्त हो जाता हैं।

हींग, धतूरे का रस और मूली के बीज को सरसों के तेल में डालकर पका लें। इस तेल को कान में डालने से कान का दर्द और बहरापन ठीक हो जाता है।स्त्री के दूध के साथ असली हींग को पीसकर कान में डालने से बहरेपन का रोग ठीक हो जाता है।

33. सोंठ : 300 मिलीलीटर सरसों के तेल में 50-50 ग्राम सोंठ, हींग और तुंबरू डालकर पका लें। फिर इस तेल को छानकर बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

34. अलसी : अलसी के तेल को गुनगुना करके कान में 1-2 बूंदे डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

35. अदरक :कपड़े से छानकर अदरक का रस गुनगुना गर्म करके 3-4 बूंद कान में टपकाएं। इससे कान का दर्द ठीक हो जाता है।
अदरक के रस को गुनगुना करके 2 से 5 बूंद कान में डालने से कान का दर्द मिटता है।

अदरक, सहजने की छाल, करेला और लहसुन में से किसी भी चीज का रस निकालकर गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

कान में मैल जमने के कारण, सर्दी लगने के कारण, फुंसियां निकलने के कारण या चोट लगने के कारण कान में दर्द हो रहा हो तो अदरक के रस को कपड़े में छानकर हल्का सा गर्म करके 3-4 बूंदे कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है। अगर पहली बार डालने से दर्द नहीं जाता तो इसे दुबारा डाल सकते हैं।

अगर ठंडे मौसम में घूमने की वजह से कान में दर्द हो रहा हो तो 5 मिलीलीटर अदरक के रस को गुनगुना करके किसी कपड़े से छानकर बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

अदरक का रस, सेंधानमक, तिल का तेल और शहद को एक साथ मिलाकर उसमें पानी मिलाकर हल्का-सा गर्म करके कान में डालकर कान को साफ करने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

मूली, अदरक और लहसुन को एक साथ मिलाकर उनका रस निकाल लें। इस रस को हल्का सा गर्म करके कान में बूंद-बूंद करके डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

36. जैतून : जैतून के पत्तों के रस को गर्म करके बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

37. कैथ : 5-5 ग्राम अर्जुन के पत्तों का रस और कैथ के पत्तों का रस लेकर गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

38. गुलाब : गुलाब के रस को कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

39. रसौत : रसौत को पीसकर शहद में मिलाकर बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

40. बरगद : बरगद के पत्तों के दूध की थोड़ी-सी बूंदे कान में डालने से कान के कीड़े मर जाते हैं।

41. मालती : मालती के पत्तों के रस में शहद मिलाकर बूंद-बूंद करके कान में डालने से पित्त के रोग के कारण पैदा हुआ दर्द ठीक हो जाता है।

42. सहजना :तेल में सहजन की जड़ की छाल का रस डालकर थोड़ा-सा गर्म करके बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।सहजने के ताजे पत्तों का रस कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

43. गूगल : गूगल और जीरे को पीसकर आग पर रखकर पका लें। पकते समय जो इसमें से धुंआ निकलता है उस धुंए को कान में लेने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

44. पीला धतूरा : सत्यानाशी (पीला धतूरा) का तेल कान में डालने से कान का दर्द, कान का जख्म और कान से कम सुनाई देना आदि रोग ठीक हो जाते हैं।

45. कोयली : कोयली के पत्तों के रस में नमक मिलाकर कान के चारों तरफ लगाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

46. पान : ठंड लग जाने के कारण पैदा हुआ कान के दर्द को ठीक करने के लिए पान के रस को थोड़ा सा गर्म करके बूंद-बूंद करके कान में डालें।

47. दूध : बकरी के दूध को कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

48. भांग : भांग के पत्तों के रस में रूई भिगोकर इस रूई को कान में दबाकर लगाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

49. अफीम :सर्दी के कारण उत्पन्न कान के दर्द को ठीक करने के लिए लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग अफीम को आग पर पका लें और फिर इसे गुलरोगन के साथ पीसकर कान में डालें। इससे लाभ मिलेगा।

अफीम की लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग भस्म को गुलाब के तेल में मिलाकर कान में टपकाने से आराम मिलता है।अफीम को ग्लिसरीन में मिलाकर बूंद-बूंद करके रोजाना हर 3-4 घंटे के बाद 2 बूंद कान में डालने से कान का दर्द कम हो जाता है।

चावल के चार दाने के समान अफीम के पत्तों की राख को गुलाब के तेल में मिलाकर कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

50. ग्वारपाठा : ग्वारपाठे के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

51. जामुन : कान में दर्द होने पर जामुन का तेल डालने से लाभ मिलता है।

52. घी : 10 ग्राम घी के अन्दर 10 ग्राम कपूर डालकर गर्म कर लें। जब वह अच्छी तरह से पक जाये तो उसे शीशी के अन्दर भरकर रख लें। कान में दर्द होने पर इस तेल की कुछ बूंद कान में डालने से लाभ मिलता है।

53. गाय का दूध : 500 मिलीलीटर गाय के दूध को गर्म करके उसके अन्दर लगभग 20 ग्राम गाय का घी मिलाकर लगातार 3 दिन तक पीने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

54. औरत का दूध : औरत के दूध की 2-3 बूंदें रोजाना कान में डालने से कान का दर्द और जख्म भी दूर हो जाता है।

55. गाय का पेशाब : गाय के पेशाब की 2-3 बूंदें कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

53. आक :आक (मदार) के पत्तों का रस, मूली का रस और सरसों के तेल को एक साथ मिलाकर पकाएं, जब पकने के बाद बस तेल ही बाकी रह जाये तो इसे उतारकर रख लें। कान के दर्द को ठीक करने के लिए इस तेल की कुछ बूंदें कान में डालें।

आक (मदार) के पीले पत्ते के ऊपर घी लगाकर कनपटी पर बांधने से कान का दर्द दूर हो जाता है।आक (मदार) के पत्तों के रस को गर्म करके कान में बूंद-बूंद करके डालने से भी कान का दर्द दूर हो जाता है।

54. कालानमक : कालानमक को गाय के पेशाब में मिलाकर गर्म कर लें। इसे कान में डालने से सर्दी की वजह से पैदा हुआ कान का दर्द ठीक हो जाता है।

55. सूरजमुखी : तेल के अन्दर सूरजमुखी के पत्तों का रस मिलाकर कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

56. मकोय : नासिका और कान के रोग में मकोय के पत्तों का गर्म रस 2-2 बूंद कान में टपकाने से लाभ मिलता है।

57. चंदन :चंदन का गुनगुना गर्म तेल कान में 2-3 बूंद डालने से कान का दर्द नष्ट हो जाता है।चंदन के तेल को कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

58. मूली :कान में दर्द हो तो मूली के पत्तों के रस को सरसों के तेल में डालकर पका लें। इस तेल की 2-2 बूंदें कान में टपकाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

मूली के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें। इसके 50 मिलीलीटर रस को 150 मिलीलीटर तिल के तेल में काफी देर तक पका लें। पकने पर रस पूरी तरह से जल जाये तो उस तेल को कपड़े मे छानकर शीशी में भरकर रख लें। कान में दर्द होने पर उस तेल को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

59. गेंदा :गेंदे के पत्तों का रस कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।कान में से मवाद निकलने और कान में दर्द होने पर गेंदे के पत्तों का रस निकालकर थोड़ा-सा गर्म करके कान में बूंद-बूंद करके डालने से लाभ मिलता है।

कान में दर्द होने पर गेंदे के फूल की पंखुड़ियों को मसलकर उसका रस निकालकर कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
हजारा गेंदे के रस को निकालकर गर्म कर लें। इसे कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

60. गिलोय : गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके कान में बूंद-बूंद करके डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

61. अजवाइन : 10 ग्राम अजवायन को 50 ग्राम तिल के तेल में पकाकर 2-2 बूंद कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

62. ग्वारपाठा : कान के दर्द को ठीक करने के लिए 10 मिलीलीटर ग्वारपाठे के रस को गुनगुना करके कान में डालने से लाभ मिलता है।

63. गुलाब : गुलाब के फूलों का ताजा रस कान में बूंद-बूंद डालने से कान के दर्द में लाभ मिलता है।

64. गूलर : गूलर और कपास के दूध को मिलाकर कान पर लगाने से दर्द ठीक हो जाता है।

65. कायफल : कायफल को तेल में पकाकर कान में दर्द होने पर डालने से दर्द दूर हो जाता है।

66. खुरासानी : खुरासानी अजवायन को तिल के तेल में मिलाकर उसके दोषों को खत्म कर दें और फिर कान में 2 बूंदों को टपकाने से कान का दर्द दूर हो जाता है।

67. भांगरा : भांगरा का रस दो बूंद कान में डालने से कान की पीड़ा नष्ट हो जाती है।

68. बिजौरा नींबू :कैथ के रस के साथ बिजौरा नींबू के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर थोड़ा-सा गर्म करके और छानकर कान में बूंद-बूंद करके डालने से दर्द समाप्त हो जाता है।

सज्जीखार को बिजौरा नींबू के रस में मिलाकर कान में डालने से कान में से मवाद बहना, कान का दर्द और कान में जलन होना आदि रोग ठीक हो जाते हैं। बिजौरे के नींबू, आम और अदरक का रस थोड़ा गर्म करके कान में डालने से आराम मिलता है।

69. भांग :भांग को पीसकर मीठे तेल में अच्छी तरह से पका लें। फिर इसे छानकर कान में डालने से कान दर्द दूर हो जाता है।भांग के 8-10 बूंद रस को कान में डालने से कान के कीड़े मर जाते हैं और कान दर्द ठीक हो जाता है।

70. लहसुन :कान के दर्द में लहसुन के रस या उसकी कलियों को तिल के तेल में देर तक पकायें। जब रस जलकर खत्म हो जाये तो तेल को छानकर, हल्का गर्म करके कान में बूंद-बूंद डालने से सर्दी से पैदा होने वाले कान का दर्द दूर हो जाता है।

लहसुन की 2 कलियों को 20 मिलीलीटर तिल के तेल में अच्छी तरह से पकाकर 1-2 बूंदें कान में डालने से बहरेपन का रोग दूर हो जाता है।
10 ग्राम लहसुन की कलियां, 20 मिलीलीटर तिल का तेल और 5 ग्राम सेंधानमक को एक साथ पकाकर कपड़े में छान लें। इसे गुनगुना ही कान में बूंद-बूंद करके डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

लहसुन की 2 कलियां, नीम के 10 नये मुलायम पत्ते और 4 निंबौली को एक साथ पीसकर सरसों के तेल में डालकर अच्छी तरह से पका लें। पकने के बाद इस तेल को छानकर किसी शीशी में भर लें। इस तेल को कान में डालने से कान का जख्म, कान से मवाद बहना, कान में फुंसी होना या बहरेपन का रोग दूर हो जाता है।

लहसुन, आक के पीले पत्ते और तिल के फूल को पीसकर उसका रस कान में डालने कान दर्द में लाभ मिलता है।
20 ग्राम लहसुन, 2 ग्राम लालमिर्च, 2 ग्राम अजवायन, 50 मिलीलीटर तिल का तेल और 1 ग्राम सेंधानमक को 300 मिलीलीटर पानी में डालकर आग पर पकाएं।

पकने के बाद बचे हुए तेल को कपड़े में छानकर बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।लगभग 200 मिलीलीटर सरसो के तेल में 4 लहसुन की कलियां डालकर पका लें। पकने के बाद इस तेल को छानकर एक शीशी में भर लें। इस तेल की 2 बूंदें दिन में 4 बार कान में डालकर रूई लगा दें। इससे लाभ मिलेगा।

अगर कान में दर्द बिना किसी जख्म के कारण ही हो रहा हो तो कान को अच्छी तरह से साफ कर लें, फिर लहुसुन और अदरक मिला हुआ रस कान में बूंद-बूंद डालने से लाभ मिलता है।

लहसुन, अदरक और करेले को मिलाकर उसका रस निकाल लें। इस रस को कान में डालने से अगर कान में बहुत तेज दर्द हो तो वह भी दूर हो जाता है।

71. नीम :कान में दर्द होने पर चंदन या नीम के तेल को गर्म करके बूंद-बूंद करके कान में डालने से लाभ मिलता है।कान में फुंसी होने पर नीम का तेल लगाने से फुंसिया ठीक हो जाती हैं।

नीम के पत्तों को पानी में डालकर उबाल लें। पानी को काफी उबालने के बाद इसमें से जो भाप (धुआं) निकलता है उसे कान में लेने से मैल ढीला होकर निकल जाता है कान साफ हो जाता है तथा कान का दर्द और घाव ठीक हो जाता है।

72. नारियल : नारियल के तेल को गर्म करें और इसे गुनगुना करके कान में कुछ बूंद डालें। इससे कान का दर्द ठीक हो जाता है।

73. श्योनाक : श्योनाक की छाल को पानी के साथ बारीक पीसकर तिलों के तेल में रख लें और तेल में दुगुना पानी मिलाकर मन्द (धीमी) अग्नि पर पकायें। जब तेल मात्र शेष रह जाये तब इसको छानकर बोतल में भरकर रख लें, इस तेल की 2-3 बूंदें कान में टपकाने से वात-कफ पित्त से पैदा होने वाला दर्द खत्म हो जाता है।

74. तुलसी :कान से मवाद बहने पर या कान में दर्द होने पर कुछ दिन तक लगातार कान में तुलसी के पत्तों का रस गर्म करके डालने से आराम मिलता है।

कान के पीछे सूजन होने पर 10 ग्राम तुलसी के पत्ते और एरण्ड के 10 ग्राम मुलायम पत्तों को पीसकर और हल्का-सा गर्म करके उसके अन्दर 5 ग्राम सेंधानमक मिलाकर कान में डालने से कान की सूजन दूर हो जाती है और दर्द भी ठीक हो जाता है।तुलसी के पत्तों के रस को हल्का गर्म करके, थोड़ा सा कपूर मिलाकर कान में 2-3 बूंदें डालें इससे कान दर्द ठीक हो जाता है।

75. लोध्र : कान में लोध्र की छाल का बारीक चूर्ण बनाकर छिड़कने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

 

डॉ.ज्योति ओमप्रकाश गुप्ता

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जबलपुर मध्य प्रदेश 

Dr. Jyoti Gupta

डॉ ज्योति ओम प्रकाश गुप्ता प्रसिद्ध चिकित्सक एवं Health सेक्शन की वरिष्ठ संपादक है जो श्री राजीव दीक्षित जी से प्रेरित होकर प्राकृतिक घरेलू एवं होम्योपैथिक चिकित्सा को जन जन तक सहज सरल एवं सुलभ बनाने के लिए प्रयासरत है, आप चिकित्सा संबंधित किसी भी समस्या के नि:शुल्क परामर्श के लिए 9399341299, [email protected] पर संपर्क कर सकते है।

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