दिल से

शायद कुदरत का मांगा वरदान कोरोना..

इस वक्त का सन्नाटा यूं ही नहीं आखिर इसका कुछ तो संयोग होगा।

धरती की छाती पर मूंग दल ने का हिसाब जो होगा।

इधर जब तक कुदरत का मुकदमा जारी है, उधर प्रकृति की मरम्मत का काम होगा।

जंगल और जंगल में रहने वालों को काटा, बर्फीली वादियों में बारूद की गंध,नदियों की बर्बादी,

वातावरण में घुला जहर इन सब का किसके पास जवाब होगा।।

आदमी को सभ्य,समझदार और जिम्मेदार बनाने के लिए प्रकृति पर जुल्म की हर एक घड़ी का हिसाब होगा।

न जाने कितनो के दर्द का इस उजाले में अंधेरे सा आभास होगा।

क्योंकि सवाल,जवाब और सजा का हर एक से भुगतान होगा।।

और अगर हिसाब बराबर हुआ तो क्या भविष्य में यह फिर से होगा?

यह सन्नाटा अपने साथ न जाने क्या-क्या समेटेगा इसका इंतजार होगा।।

Tiwari |

अपनी कविता से समाज को इस विषम परिस्थिति में न हारने और प्रण लेने के लिए लक्षित करते अभिषेक तिवारी, मेरठ के दीवान इंस्टिट्यूट में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र हैं। देशभक्ति से ओतप्रोत लेखन एवम काव्य रचनाएं करना उनकी अभिव्यक्ति हैं।

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