Sant Nirankari Mission के तत्वावधान में मुक्ति पर्व-विशेष सत्संग कार्यक्रम आयोजित
Sant Nirankari Mission वह सेवा की एक जीवंत मूर्ति थी, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन ही मिशन एवं भक्तों की निःस्वार्थ सेवा में अर्पित किया। उसके उपरांत जब शहनशांह बाबा अवतार सिंह जी सन् 1969 को ब्रह्मलीन हुए, तभी से यह दिन ‘शहनशांह-जगतमाता दिवस’ के रूप में सम्बोधित किया जाने लगा। सन् 1979 में संत निरंकारी मण्डल के प्रथम प्रधान लाभ सिंह जी ने जब अपने इस नश्वर शरीर का त्याग किया, तभी से बाबा गुरबचन सिंह जी ने इस दिन को ‘मुक्ति पर्व’ का नाम दिया।
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