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थक गया है हर शख़्स काम करते करते , तू इसे अमीरी का बाज़ार कहता है….

थक गया है हर शख़्स काम करते करते ।तू इसे अमीरी का बाज़ार कहता है

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शिव शब्द, शिव अर्थ, शिव ही परमार्थ है….

आप और आपके परिवार के लिए श्रावण शुभ हो।. शिव स्वर्ग, शिव मोक्ष, शिव परम साध्य है !शिव जीव, शिव बह्मा, शिव ही आराध्य है !!

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अंग्रेजों ने प्राचीन भारतीय गुरुकुल पद्धति को नष्ट करके अंग्रेजी शिक्षा पद्धति लागू करके संस्कृति व सँस्कार समाप्त कर दिया-प्रमोद त्यागी

इसकी ड्राफ्टिंग ‘लार्ड मैकाले’ ने की थी। लेकिन उसके पहले उसने यहाँ (भारत) के शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था, उसके पहले भी कई अंग्रेजों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था के बारे में अपनी रिपोर्ट दी थी।

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यज्ञ में जावित्री की आहुति कोरोना वायरस को समाप्त करने मे सक्षम है: ‌‌डा0 सतेन्द्र सिंह

भारत की संस्कृति यज्ञ संस्कृति रही है यज्ञ ने इस देश को महामारी संक्रामक रोग से बचाया है यहां जो भी महामारी आई पराधीनता के काल में आई या जब से हमने यज्ञ करना कराना छोड़ दिया 5000 वर्ष पूर्व महाभारत काल तथा इसके कुछ शताब्दियों तक पश्चात अनुष्ठान किए गए यज्ञ का ही प्रभाव था भारत 18 वीं शताब्दी तक संक्रामक रोगों से रहित रहा भारत भूमि विषाणु जीवाणु रोधी रही है |

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कैसा ये नववर्ष है , जिससे सूरज भी शरमाया है…

मूलतः शांत स्वभाव के दिखने वाले श्री ओम प्रकाश गुप्ता (सम्पर्क: 9907192095) एक प्रखर राष्ट्रवादी ,विद्रोही रचनाकार लेखक एवं समाज सेवक है जो समसामयिक विषयों पर अपनी तल्ख रचनाओं एवं टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं|

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पटाखों पर बैन: सिर्फ़ Diwali पर चलने वाले पटाखे ही Pollution का एक मात्र कारण?

अब यदि पूरे साल के अपेक्षा Diwali पर ही अधिक पटाखे चलाए जाते है तो फिर ये भी है कि पटाखा इंडस्ट्री की कमाई दीपावली पर ही अधिक निर्भर होती है ।

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सोए देश को जगाना होगा..

मूलतः शांत स्वभाव के दिखने वाले श्री ओम प्रकाश गुप्ता (सम्पर्क: 9907192095)  एक प्रखर राष्ट्रवादी ,विद्रोही रचनाकार लेखक एवं समाज सेवक है जो समसामयिक विषयों पर अपनी तल्ख रचनाओं एवं टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं| 

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अनमोल लोगों से रिश्ता रखता हूँ…

और आज कई बार बिना मुस्कुराये
ही शाम हो जाती है.

कितने दूर निकल गए
रिश्तों को निभाते निभाते,

खुद को खो दिया हम ने
अपनों को पाते पाते.

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अपनी कलम से -पैग़ाम ए मुल्क

सभी देशवासियों को अग्रिम शुभकामनाएं देता हूं तथा मै उन सभी पुण्यात्माओं के सामने नतमस्तक हूं जिन्होंने आजादी के हवनकुंड में अपने प्राणों की आहुति देकर, उस यज्ञ को सफल बनाया ।

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