दिल से

राही: जीवन (life) की कठिन डगर पर तुझको आगे बढ़ते जाना…

बहुत दूर है जाना तुझको
दूर है तेरी मंजिल

होश में आ जा ,कदम बढ़ा जा
राह है तेरी मुश्किल

1. परिस्थितियां रोकेंगी तुझे ,
बंधन जकड़ेगे तुझे

चंचल ये मन तेरा
रोकेगा तुझे बढ़ने से

मन पर काबू पाकर अपने
गंतव्य तक अपने आ जा ।

बहुत दूर तक जाना तुझको अब तो कदम बढ़ा जा।
2. नदियां और पहाड़ मिलेंगे सुख-दुख के संसार मिलेंगे

अपने मिलेंगे साथी मिलेंगे
छल खल कामी और सांप मिलेंगे शत्रु और संताप मिलेंगे

जीवन (life) की कठिन डगर पर तुझको आगे बढ़ते जाना
बहुत दूर है जाना तुझको अब तो कदम बढ़ा जा।

डॉ0 ओम प्रकाश गुप्ता

डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता (संपर्क: 9907192095) एक प्रखर राष्ट्रवादी लेखक और समाज सेवक हैं, जो अपनी विद्रोही रचनाओं और समसामयिक विषयों पर तीक्ष्ण टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। शांत स्वभाव के बावजूद, उनके लेखन में सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज और राष्ट्रहित की गहरी प्रतिबद्धता झलकती है। उनकी रचनाएँ न केवल सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती हैं, बल्कि राष्ट्रहित और गौ माता जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों की रक्षा के प्रति जागरूकता उत्पन्न करती हैं।

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