Health Alert: homeopathy में “पेन किलर” की भरमार, आखिर यह दर्द क्यों ?

Health Alert: किसी भी जीव के शरीर में यदि कोई असामान्य परिवर्तन हो जाय तो वह सर्वप्रथम दो रूप में प्रकट होता है . पहला दर्द के साथ तथा दूसरा दर्द रहित दर्द रहित कम परेशानी वाला होता है और दर्द युक्त कष्ट से हर जीव काफी चिंतित होता है . दर्द युक्त परेशानी में रोगी की मानसिक स्थिति कुछ और जबकि दर्द रहित की मानसिक स्थिति कुछ और होती है.

लोग दर्द को अपना दुश्मन समझते हैं , वह आँया यानि हमें परेशानी में उलझ जाना है . लोगों को तो यह समझना चाहिए की दर्द हमारा मित्र है , हमारा शुभ चिंतक है . यह तो , यह इंगित करता है कि अमुक हिस्से में कोई न कोई खराबी आ गयी है जिसका संकेत हमें दर्द के रूप में आया है . हमें सजग करता है कि अमुक भाग में कोई परेशानी है जिसका इलाज करवा लेना चाहिए

 नहीं तो स्थिति कुछ भी बिगड़ सकती है . दर्द होने पर रोगी की मानसिक स्थिति में क्या परिवर्त्तन हुआ , इसे भी एक होमियोपैथिक चिकित्सक को समझना एवं पढ़ना आवश्यक होता है . यदि मरीज को परेशानी न हो तो वह व्यक्ति उस बीमारी का इलाज करवाना भी उचित नहीं समझता है . या उसकी अनदेखी कर देता है . कुछ लोगों के मन में तो यह सोच होता है कि जब परेशानी होगी तो देखा जाएगा

यह बात सर्वथा उचित नहीं है . यदि किसी व्यक्ति को दर्द हो तो उसके मानसिक प्रतिविम्ब को पढ़ना एवं समझना काफी हद तक दवा चुनाव में मदद मिलता है . किसी व्यक्ति को दर्द होता है तो वह अकेला रहना चाहता है , सांत्वना चाहता है , गाली – गलौज करता है , कोई धूम्रपान करता है , कोई ठहाका लगा कर हंसता है तो कोई विलाप करता है , तो कोई दर्द के कारण चिड़चिड़ा हो जाता है 

आखिर यह क्यों दर्द के दौरान ही होता है ? क्या इस मानसिक लक्षण को आधार बनाकर दवा चुनाव करने से रोगी को दर्द से राहत मिल सकती है ? हां इन लक्षणों को ध्यानपूर्वक लेने से काफी जल्दी सकारात्मक परिणाम सामने आ जायेंगे . एक और प्रश्न उठता है कि रक्त , पेशाब , पखाना को जांच में आयी खराबी क्या ठीक हो जाती है तो इसमें भी परिवर्तन हो जाता है . –

प्रस्तुत है कुछ लक्षणों पर आधारित होमियोपैथिक (homeopathy) औषधि

1. ब्रेन में सूजन , गांठ के कारण सिर दर्द होना _नेट्रम म्यूर .
2 . कान दर्द करने के साथ मवाद निकलने पर __मार्क बोल
3 . बच्चे का कान दर्द ठंड के कारण होने पर _कैमोमिला
4 . पेट दर्द के दौरान प्यास अधिक लगना_कैमोमिला
5 . दर्द के कारण रोगी अधिकतर चिहुंकना ( स्टारटिंग )__ अर्जेंटम नाइट्रिकम .
6 . सिर में खुजली के बाद दर्द होना_ सीपिया . –
7 . सिर इतनी खुजलाती हो कि दर्द हो जाय__ सैबाडिला .
8.दांत दर्द के कारण पीड़ित व्यक्ति बेचैनी हो जाए तो ऐसे में मेजेरियम अवश्य याद करना चाहिए .
9. अतिसार के दौरान गुदा में दर्द होना —कोलोसिन्थ .
10 . गुदामार्ग दर्दनाक एवं बाहर निकल जाने पर— आर्सेनिक एल्ब .
11. गठिया के दर्द आराम होने पर कमजोरी का एहसास होना— बेलिस पर्नि ०
12. हर्निया में अधिक दर्द होना —-कोक्कुलस इंडिका .
13. पेट दर्द के कारण वमन होना —-कोलोसिन्थ .
14. दर्द इतनी अत्यधिक कि रोगी अपने कष्ट से मर जाना बेहतर समझता हो तो— रैटानिया .
15. रोगी अपने दर्द या कष्ट से हतोत्साह हो गया हो–* सर्सा पैरिल्ला .
16. सिर दर्द या बदन दर्द होने के पहले चक्कर आना—- रैननकुलस बल्ब .
17. सिर दर्द एवं खुजली जलन युक्त हो तो —-आर्सेनिक अल्ब .
18. आंख के कोर्निया में अल्सर दर्दनाक हो तो— मर्क कोर .
19. मैथुन क्रिया के दौरान वीर्यपात होते समय लिंग अथवा अंडकोष में दर्द हो तो —*सर्सा पैरिल्ला
20. उपवास के समय पीठ में दर्द होने पर —-काली नाइट्रिकम .
21. रात में खांसते – खांसते छाती में दर्द होने—- रस टॉक्स
22. हाथ में दर्द के कारण कम्पन्न होने पर— कॉस्टिकम
23. दर्द के नाम से भयभीत होना कि यह दर्द मैं कैसे झेल पाऊंगा—– सल्फर .
24. दर्द की प्रचंडता इतनी अधिक की रोगी का हृदय कांप उठता हो –**कैमोमिला .
25. दर्द के कारण रोगी विक्षिप्तता का शिकार हो जाय —हाइपेरिकम वेरेंद्रम अल्ब .
26. दर्द के दरम्यान रोगी का स्वभाव काफी चिड़चिड़ा हो गया हो तो—- ओपियम .
27. जब रोगी दर्द के कारण प्रलाप करे तो ——वेरेद्रम अल्ब सेवन करना चाहिए —–

28. रोगी को यह भ्रम या कल्पना करता हो कि जब वह सो जाएगा तो दर्द बढ़ जाएगा —-एलुमिना
29. दर्द से पीड़ित व्यक्ति को यह लगे कि दर्द कम नहीं होगा इस दर्द को झेलने से बढ़िया है कि आत्म हत्या करे—- ऑरम मेट .
30 पेट दर्द के कारण रोगी बेचैन हो तथा बार – बार वमन करता हो तो— आर्सेनिक अल्ब .
31. दर्द के कारण काफी संवेदनशील रहना रोगी को थोड़ा भी दर्द हुआ वह शीघ्र दवा की व्यवस्था करने लगता है कि एक —एकोनाइट
32. कभी दर्द की आक्रमकता से तो दुःखी— प्लेटिना कभी खुश हो जाना -कैमोमगला
33 . दर्द के कारण रोगी निराश हो जाय तो— कैमोमिला .
34. पेट के दर्द से रोगी यह समझ ले कि यह अब मेरा पीछा नहीं छोड़ सकता .— कॉफिया क्रुड
35. दर्द के कारण रोगी सुस्त हो जाय , सोचने , समझने की भी क्षमता खत्म हो जाय तो —नेट्रम कार्ब
36. थोड़ी सी दर्द हुई कि पीड़ित व्यक्ति उदास होकर बैठ जाय – कार्बो वेज .
37. सिर दर्द होने पर सिर ठंढा हो तो – जेल्सीमियम , 38. दांत दर्द के परेशानी से रोगी रो रहा हो —कैमोमिला
39.जब रोगी बोले कि डॉक्टर साहब दर्द यदि हो जाएगा या होगा तो यह मुझे बर्दास्त नहीं होगा , सिर्फ इसी बात का हमें डर है –एलियम सीपा
40. दर्द से मेरा मन उब चुका है , ऐसी जीवन में थक गया हूं कृपया इस दर्द के लिए कुछ किंजिए डॉक्टर साहब – फाइटोलेक्का डी ०
41. सिर भारी – भारी लगे तथा दर्द युक्त रहे तो- सैबाडिला
42. सिर दर्द बारह बजे दिन से लेकर अर्धरात्री तक रहे तो – कोलोफाइलम
43. दर्द इतनी तीक्ष्ण कि पीड़ित व्यक्ति बेहोश हो जाय— हीर सल्फ , वेलेरियाना .
44. जब रोगी को लगे कि कहीं दर्द हो गया तो कैसे सहन होगा— मर्क ब्रोम
45. दर्द के दौरान रोगी काफी चिड़चिड़ा हो जाता है – कोलचिकम , ओपियम
46. दर्द के दरम्यान रोगी जब विलाप करें , चिल्लाता हो तो– नक्स वोमिका
47. जब रोगी के मन में दर्द के प्रति घृणा हो— फाइटोलेक्का
48. दर्द के दौरान जब रोगी के मन में अतिशय घृणा हो तो —एलोज सो.
49 दर्द के कारण रोगी का यादास्त कमजोर हो गया हो— पल्साटिला .
50. दर्द से मन का अवसाद ग्रसित होना- बम्बुसा ए ०
51. दर्द के कारण रोगी का स्वभाव झगड़ालू हो गया हो — नक्स वोमिका
5.2 दर्द की उग्रता होने पर रोगी बेचैन भी हो और हंसता भी हो ऐसे मरीज को हुरा नामक दवा देनी चाहिए .
53. पैर में दर्द के कारण बेचैनी रहने पर— स्टेफिसिग्रिया
54 रति क्रिया के बाद पूरे शरीर में दर्द होना— साइलिशिया .
55. घूटना में अकड़न युक्त दर्द होने पर —ब्रायोनिया
. 56. जोड़ों में दर्द युक्त अकड़न होने पर —रस टैक्स
57. मांसिक शुरू होते ही पीठ में दर्द होने पर— वल्गेरिस कॉक्कुलस इंडिका .
58. स्पाइन के क्षय होने के कारण दर्द होने पर— साइलिशिया .
59 छाती में कफ जमने के कारण स्वरतंत्र तथा छाती में दर्द हो —-अर्जेन्टम मेटालिकम .
60. पैखाना के दौरान अंडकोष में दर्द होना — फॉस्फोरस
61. गठिया के बारे में हमेशा चिंतित रहना – एसाफोटिडा
62. घूटना में दर्द के कारण अधोभाग में कमजोरी .. कोलोफाइलम
63. दर्द से नींद कम आना – प्लम्बम मेट ..
64. दर्द से पैर में बेचैनी होना — एसिड फॉस्फोरिका
65 औरत को जननांग में दर्द होने पर सेक्स की इच्छा बढ़ जाना – ऐंडोक्टोनस

मेरे कहने का तात्पर्य बस केवल इतना है कि एलोपैथ से कहीं ज्यादा तेजी से काम करता है होम्योपैथिक पेन किलर बस जरूरत है तो लक्षणा अनुसार दवा का चयन करके उसके उपयोग करने का।

Dr. Ved Prakash

डा0 वेद प्रकाश विश्वप्रसिद्ध प्राकृतिेक एवं होमियोपैथी चिकित्सक हैं। जन सामान्य की भाषा में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को घर घर पहुँचा रही "रसोई चिकित्सा वर्कशाप" डा0 वेद प्रकाश की एक अनूठी पहल हैं।

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