ITR फॉर्म का सेलेक्‍शन: नई कर व्यवस्था या पुरानी कर व्यवस्था के बीच चयन

अपूर्ण ITR या गलत जानकारी के कारण आपका आईटीआर अमान्य माना जा सकता है या लेट जमा करने पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अगर आप पहली बार आईटीआर दाखिल कर रहे हैं, तो 9 महत्वपूर्ण बातें हैं, जिन्हें आपको ध्यान में रखना चाहिए। सटीक फाइलिंग के लिए टैक्‍सपेयर्स की आवासीय स्थिति और विभिन्न सोर्सेज से अर्जित इनकम के आधार पर लागू आईटीआर फॉर्म का चयन करना महत्वपूर्ण है।

यदि टैक्‍सपेयर्स गलत टैक्‍स रिटर्न फॉर्म का उपयोग करता है, तो उनके रिटर्न को प्रोसेस्‍ड नहीं किया जाएगा और उन्हें टैक्‍स डिपार्टमेंट से नोटिस प्राप्त हो सकता है। टैक्स डिपार्टमेंट ने बदले हुए आईटीआर फॉर्म को पहले ही नोटिफाई कर दिया है। इस साल आईटीआर 1 फॉर्म उस व्यक्ति के लिए लागू नहीं होगा जिसने धारा 194एन के तहत कैश निकालने के लिए टीडीएस का भुगतान किया था।

जिन कर्मचारियों ने कर्मचारी स्टॉक विकल्प (ईएसओपी) पर टैक्‍स टाल दिया है, वे भी आईटीआर 1 फॉर्म का उपयोग नहीं कर सकते हैं। इसलिए रिटर्न फाइल करने से पहले सही फॉर्म का चुनाव करें।

मौजूदा फ‍िस्‍कल ईयर एक नई रियायती कर व्यवस्था शुरू की गई है। अब, करदाताओं को कर रिटर्न दाखिल करते समय पुरानी और नई कर व्यवस्थाओं के बीच चयन करने का अवसर मिलेगा। नई कर व्यवस्था के तहत, एक व्यक्ति को रियायती दरों पर कर का भुगतान करना होगा यदि वे सभी टैक्‍स छूट, कटौती और छूट को छोड़ देते हैं।

यदि आप सैलरीड पर्सन हैं और नियोक्ता को बताए गए ऑप्‍शन को बदलना चाहते हैं। व्यापार मालिकों के लिए कर व्यवस्था चुनना अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि वे इसे केवल एक बार ही कर सकते हैं। एक बार जब वे अपनी कर व्यवस्था चुन लेते हैं, तो इसे हर साल नहीं बदला जा सकता है।


टैक्स डिपार्टमेंट ने वित्त वर्ष 2021 के लिए प्री-फिलिंग टैक्स रिटर्न फॉर्म के लिए JSON नाम की एक नई व्‍यवस्‍था पेश की है। फिलहाल सिर्फ टैक्स रिटर्न फॉर्म आईटीआर 1, 2 और 4 ही जारी किए गए हैं। ये फॉर्म ई-फाइलिंग पोर्टल से डाटा इंपोर्ट और प्री-फिल कर सकते हैं। पहले से भरे गए डाटा में पर्सनल डिटेल्‍स, सैलरी इनकम, डिविडेंड इनकम, इंट्रस्‍ट इनकम, कैपिटल बेनिफ‍िट और फॉर्म 26एएस में उपलब्ध सभी जानकारी शामिल हैं। इससे टैक्‍सपेयर्स को आईटीआर दाखिल करने में आसानी होगी, क्योंकि अधिकांश आवश्यक विवरण पहले से ही उसमें दर्ज होंगे।

आपको फॉर्म में पहले से भरी गई जानकारी को सत्यापित करने और टैक्स रिटर्न में रिपोर्ट नहीं की गई आय को जोड़ने की जरुरत है। हालांकि, अगर जानकारी गलत है, तो तिमाही टीडीएस रिटर्न/अन्य फाइलिंग में डेटा को सही करने के लिए बैंक/आय के भुगतानकर्ता आदि से संपर्क करें ताकि सटीक जानकारी परिणामस्वरूप आपके फॉर्म नंबर 26एएस में दिखाई दे।


अपनी रिटर्न दाखिल करने के लिए बैठने से पहले, आपको आय की किसी भी गलत रिपोर्टिंग या गलत रिपोर्टिंग से बचने के लिए आईटीआर दाखिल करने की प्रोसेस के लिए आवश्यक सभी जानकारी और दस्तावेजों का मिलान करना चाहिए। यह सुनिश्चित करें कि पीपीएफ जैसी छूट वाली इनकम सहित आय के सभी सोर्स टैक्स रिटर्न में विधिवत रूप से बताए गए हैं। आईटीआर फाइल करने से पहले फॉर्म 16, फॉर्म 26 एएस में बताए गए डाटा के साथ आय के सभी सोर्स का मिलान करें।

फॉर्म 26एएस के साथ सोर्स पर टैक्‍स कटौती (टीडीएस), एडवांस टैक्‍स और सेल्‍स असेसमेंट टैक्‍स सहित प्रीपेड टैक्‍सेस को वेरिफाई करें। इसमें किसी भी कमी को या तो इंप्‍लॉयर (वेतन आय के मामले में) या अन्य भुगतानकर्ताओं (अन्य आय के मामले में) या बैंकों (अग्रिम कर/स्व-मूल्यांकन कर भुगतान के लिए) को आवश्यक सुधार के लिए नोटिफाइड किया जाना चाहिए, जो कि बिना रुकावट के आवश्यक है।


किसी भी त्रुटि से बचने के लिए, अपनी टैक्‍स लायबिलिटी एडवांस असेसमेंट करें और तय डेट के अंदर आवश्यक कर भुगतान करें। यह आपको विलंबित कर भुगतान पर लागू ब्याज से बचने में मदद करेगा। एक बार जब आप अपनी कुल टैक्‍सेबल इनकम, सभी सोर्स से होने वाली इनकम और अधिनियम के चैप्‍टर VI-A के तहत उपलब्ध आवश्यक कटौती का दावा कर लेते हैं, तो कुल कर देयता की गणना के लिए लागू टैक्‍स रेट्स को लागू करें।

प्रीपेड करों के क्रेडिट का दावा करने के बाद टैक्स रिटर्न पर देय किसी भी कर का भुगतान आईटीआर दाखिल करने से पहले लागू ब्याज सहित किया जाना चाहिए। यदि ऐसा सेल्‍फ असेसमेंट टैक्‍स 1 लाख रुपये से अधिक है, तो इसे 31 जुलाई 2021 से पहले भुगतान किया जाना चाहिए ताकि अतिरिक्त ब्याज देने से बचा जा सके, भले ही टैक्स रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा 30 सितंबर 2021 तक बढ़ा दी गई हो।

आईटीआर के लिए आवश्यक  डिसक्‍लोजर

  • सभी भारतीय बैंक अकाउंट्स का स्‍पेसिफाइड डिटेल्‍स।
  • अनलिस्टिड इक्विटी शेयरों का स्‍पेसिफाइड डिटेल्‍स।
  • भारतीय या विदेशी कंपनियों में धारित निदेशक पद का विवरण।
  • शेड्यूल संपत्ति और देनदारियां : स्‍पेसिफाइड का विवरण [(जैसे भूमि, भवन, चल संपत्ति, आदि), वित्तीय संपत्ति (बैंक जमा, शेयर और प्रतिभूतियां, नकदी में हाथ, आदि)] और संबंधित देनदारियों का खुलासा किया जाना है। ऐसे मामले में किसी व्यक्ति की कुल आय 50 लाख रुपए से अधिक होना जरूरी है।


फाइनेंस (संख्या 2) अधिनियम, 2019 उन चुनिंदा व्यक्तियों के लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है जो प्रासंगिक वित्तीय वर्ष के दौरान कुछ स्‍पेसि‍फाइड क्राइटेरिया को पूरा करते हैं, भले ही ऐसे व्यक्तियों की आय टैक्‍सेबल ब्रैकेट में ना हो। अगर आपने एक लाख से ज्‍यादा का बिजली बिलों का भुगतान किया हो। एक या एक से अधिक चालू बैंक खातों में कुल मिलाकर 1 करोड़ रुपए से अधिक की जमा राशि की हो। अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए विदेश यात्रा पर कुल मिलाकर 2 लाख रुपए से अधिक खर्च किए हो। ऐसे लोगों को आईटीआर फाइल करना अनिवार्य है।


यदि किसी टैक्‍सपेयर्स ने अपेक्षित वेतन, पिछले नियोक्ता से वर्तमान नियोक्ता को अर्जित आय का विवरण प्रस्तुत किया है, तो वर्तमान नियोक्ता आधार पर एक फॉर्म 16 और 12बीए जारी किया जा सकता है जिसे आईटीआर दाखिल किया जा सकता है। ऐसे में टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले लागू ब्याज के साथ रिटर्न पर देने वाले एक्‍स्‍ट्रा टैक्‍स का भुगतान किया जाना चाहिए।


यदि कोई टैक्‍सपेयर्स कई कारणों जैसे कि प्रासंगिक दस्तावेजों / सूचनाओं की अनुपलब्धता, समय की कमी, व्यक्तिगत आवश्यकताओं, आदि के कारण नियत तारीख तक आईटीआर प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं है, तो इसके तहत विभिन्न परिणाम हो सकते हैं। आयकर अधिनियम जैसे लेट फाइलिंग शुल्क, शेष कर देयता पर ब्याज का भुगतान करना पड़ सकता है। ऐसे में समय सीमा तक अपना रिटर्न दाखिल करना सुनिश्चित करें। 60 वर्ष से कम आयु के निवासी व्यक्ति को प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपए तक की आय आयकर से मुक्त है।

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