दिल से

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दिल से

राजलता की कलम से……मैं कल फिर आऊंगा

अस्त से उदय होते देखना मुझे

देना नई विवेचना!

चढ़ते सूरज को सलाम

करते है लोग ,कहते है

जीवन है प्रारंभ से अंत

हो जाता हूं मै अंत से फिर प्रारंभ

नए अर्थ मैं देखना, मेरे इस रुप को

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