उत्तर प्रदेश

Gyanvapi Case: ज्ञानवापी मसाजिद कमेटी ने मांगी हौज की सफाई की अनुमति, Hindu पक्ष की कड़ी आपत्ति

 Gyanvapi Case: अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने हौज की सफाई और मछलियों के लिए पानी डालने की अनुमति मांगी है। मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर में सील किए गए स्थल की सफाई और मछलियों के पानी डालने की अनुमति दी जानी चाहिए।

इस पर वादिनी राखी सिंह के अधिवक्ता मान बहादुर सिंह ने कड़ी आपत्ति की और कहा कि अंजुमन को साफ-सफाई की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। वहां हम प्रभावित हैं और वहां हमारे आराध्य देव हैं। ऐसे में हमें साफ-सफाई की अनुमति दी जाए। उन्होंने दलील दी और कहा कि वह एरिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सील हैं। ऐसे में इस मुद्दे पर सुनवाई का अधिकार इस अदालत को नहीं है। 

इस बीच चार महिला वादियों के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी व सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने मछलियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने और जल्द ही सुनवाई होने की जानकारी दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश आने तक कोई आदेश पारित न करने का अनुरोध किया। अदालत ने दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद बृहस्पतिवार को आदेश जारी करने के लिए कहा।  

ज्ञानवापी मामला: एक अविभाज्य धार्मिक स्थल का विवाद

भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक धरोहरों की अमूर्त सूची में स्थान पा रहे काशी विश्वनाथ धाम के प्रमुख भगवान काशीविश्वनाथ के मंदिर के समीप स्थित ज्ञानवापी मंदिर का मामला, वर्तमान में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसे ‘ज्ञानवापी मामला’ कहा जाता है, जिसमें एक पूर्व मुघल बादशाह और हिंदू धर्मीय समुदाय के बीच संघर्ष का सिरा है।

मामले का मुद्दा उत्पन्न हुआ था जब अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने ग्यारहवीं सदी के एक मुघल बादशाह, औरंगजेब, द्वारा निर्मित काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रांगण में स्थित ज्ञानवापी मंदिर को अपने नियंत्रण में लेने का आरोप लगाया। कमेटी ने इसे एक धार्मिक स्थल की सुरक्षा और पुनर्निर्माण की जरूरत के रूप में देखा है।

इसके खिलाफ, विभिन्न हिंदू संगठन और धार्मिक नेताओं ने मुख्य रूप से इसे भूमिहीन और धार्मिक अपमान का एक प्रमाण मानकर आपत्ति जताई है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद निर्णय होना प्रतीत हो रहा है, जिससे इस अविभाज्य धार्मिक स्थल के विवाद का समाधान हो सकता है।

ज्ञानवापी मामला में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ग्यारहवीं सदी में मुघल बादशाह औरंगजेब द्वारा निर्मित काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रांगण में स्थित ज्ञानवापी मंदिर को लेकर आए आरोपों का सामरिक और सांस्कृतिक पहलु है। अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता ने कहा है कि ज्ञानवापी परिसर में सील किए गए स्थल की सफाई और मछलियों के पानी डालने की अनुमति दी जानी चाहिए, जो इसे सुरक्षित और साफ रखने की आवश्यकता के रूप में प्रस्तुत करता है।

हिंदू धर्म समुदाय की ओर से इसे भूमिहीन और धार्मिक अपमान का एक प्रमाण मानकर आपत्ति जताई जा रही है। धार्मिक संगठनों ने मुख्य रूप से इस मामले को एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक विवाद के रूप में देखा है और इस पर न्याय दिलाने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद इस मामले का निर्णय हो सकता है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस धार्मिक स्थल के विवाद का समाधान कैसे होगा। इस मामले का निर्णय देश के सांस्कृतिक और धार्मिक सामरिकता के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है जो समृद्धि और सामंजस्य की दिशा में बढ़ सकता है।

News Desk

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